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FAIL हो गया बीजेपी का ” मोदी है तो मुमकिन है ” अभियान …

FAIL हो गया बीजेपी का ” मोदी है तो मुमकिन है ” अभियान …

लोकसभा चुनाव 2019 से कुछ दिन पहले मोदी जी नें अपनी उपलब्धियों को मद्देनज़र रखते हुए एक नारा दिया “मोदी है तो मुमकिन है”  2014 चुनाव से पहले मोदी नें लोगों को यकीन दिलाया था कि “अच्छे दिन आएँगे” वहीँ 2019 के चुनाव से पहले PM मोदी अपने मुँह मियां मिट्ठू बनके कई सभाओं में कहते दिखाई दिए मोदी है तो मुमकिन है .. ना सिर्फ मोदी बल्कि उनके मंत्री अरुण जेटली नें भी इस नारे को की तारीफें करते हुए अपने एक पोस्ट में लिखा था कि PM 5 सालों की मेहनत के बाद अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है और एसा कोई और नहीं कर पाएगा .. कुछ इस तरह पूरी भारतीय जनता पार्टी “मोदी है तो मुमकिन है” के गुणगान में लग गयी ..

source: DNA India

जहाँ एक तरफ कुछ समय पहले यह नारा पूरी तरह जोरो-शोर से सुनने में आया वहीँ अब यह नारा पूरी तरह ठंडा पड़ चुका है. ना सिर्फ मोदी जी बल्कि भाजपा का कोई भी नेता अब अपनी जुबान से किसी भी सभा में इस नारे का प्रयोग नहीं कर रहा  है . यह बात सच है कि बीजेपी  के नेताओं के भाषणों ,सभाओं और रैलियों में अब  Modi Hai To Mumkin Hai है का नारा सुनाई नहीं देता | क्या आपने सोचा है PM मोदी के जिस नारे को भाजपा हर जगह प्रयोग में ले रही थी  वो अचानक से ठंडे बसते में क्यों चला गया ? आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ पड़ी की बीजेपी कोअपना यह नारा अपने flagship campaign से withdraw करना पड़ा ?

source: The Indian Express

हमारे सूत्र बता रहे हैं की इस नारे के कहीं खो जाने की वजह विपक्ष का हमलावर होना है . यहाँ एक तरह मोदी सरकार नें अपने कुछ अच्छे कामों को गिनाते हुए कहा की मोदी है तो मुमकिन है वहीँ विपक्ष नें हमला किया और मोदी जी की बड़ी नाकामयाबियों को गिनवाते हुए कहा की मोदी है तभी यह मुमकिन है . उनका मानना साफ़ – साफ़ यह था की नोटबंदी से परेशान जनता , जनता के पैसों से विदेशी दौरे ,देश की सुरक्षा की बदहाली , नौजावानो और किसानों का यह सबसे बुरा हाल , एसा सिर्फ मोदी है तो मुमकिन है ..

यह बात साफ़ है की इस कैम्पेन के पूरी तरह बंद हो जाने का मतलब सिर्फ यही है की मोदी सरकार विपक्ष के हमलों का बराबर जवाब नहीं दे पा रही थी और साबित नही कर पा रही थी कि उनका दिया नारा एकदम सत्य है . शायद इसीलिए अब इसकी गूंज किसी नेता के कोई पोस्ट और बयान में दिखाई सुनाई नहीं देती है और ना ही किसी सभा में क्यूंकि कहीं ऐसा न हो कि जनता भी यह न पूछने लग जाए की आखिर.कैसे मोदी है तो मुमकिन है ..

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