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Bihar : ‘चमकी’ बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर हुई 111, आखिर कौन है इन मौतों का ज़िम्मेदार ?

Bihar : ‘चमकी’ बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर हुई 111, आखिर कौन है इन मौतों का ज़िम्मेदार ?

देश के डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं और मासूमों की जान जारही है लेकिन देश जनता बस Pakistan से Cricket का मुक़ाबला जीतकर ही खुश है। UP में CM योगी के क्षेत्र गोरखपुर यह दूसरा मसला है यहाँ अबतक 111 मौत हो चुकी हैं और अबतक थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। अब देखना होगा सरकार इसे काम करने के लिए क्या कदम उठती है।

हिंन्दुस्तान लाइव के लेख अनुसार , बिहार के मुजफ्फरपुर में रविवार को आठ और बच्चों की चमकी के कहर से मौत के बाद अब तक इससे मरनेवाले बच्चों की कुल संख्या बढ़कर 111 जा पहुंची है। लगातार हो रही बच्चों की मौत का यह आंकड़ा पिछले 15 दिनों तक का है। गर्मी बढ़ने से सुबह से गंभीर हाल में बच्चे को अस्पतालों में लाए जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

इसकी रोकथाम को लेकर अब तक जो भी प्रयास किए जा रहे हैं वो स्थिति को देखते हुए नाकाम साबित हो रही है।

चमकी से मुजफ्फरपुर के SKMCH, केजरीवाल अस्पताल के वार्ड-ICU फुल

हालत ये हो गई है कि मुजफ्फरपुर के SKMCH  और केजरीवाल अस्पताल के वार्ड-ICU फुल हो गए हैं। इसी बीच मुजफ्फरपुर में बीमारी का जायजा लेने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन पहुंच गए हैं। उनके साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कई आला अधिकारी और विशेषज्ञ भी साथ में आए हैं। यहां बता दें कि मुजफ्फरपुर व आसपास के जिलों में अब तक 95 से अधिक बच्चों की मौत चमकी बुखार और एईएस से हो चुकी है।

SKMCH  में डॉक्टर की कमी और बंदइंतजामी

ऐसा कहा जा रहा है कि एनसिफलाइटिस के चलते यह मौत हो रही है। उधर, चमकी बुखार का का इलाज मुजफ्फरपुर के SKMCH  में करा रहे बच्चों के परिजनों को समझ नहीं आ रहा है कि वे इस स्थिति से मुकाबला कैसे करें। उसकी वजह ये हैं कि हॉस्पीटल के ICU वॉर्ड तक भी डॉक्टरों की भारी कमी है। न बच्चों को ठीक से देखा जा रहा है और न ही उन्हें समय पर दवाएं दी जा रही है।

Bihar : 'चमकी' बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर हुई 111, आखिर कौन है इन मौतों का ज़िम्मेदार ?
Source:The New York Time

चमकी बुखार पीड़ित बच्चों पर डॉक्टर नहीं दे रहे पूरा ध्यान

समाचार एजेंसी ANI ने चमकी बुखार पीड़ित बच्चे के एक पिता के बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा- यहां पर मरीजों के लिए ठीक से व्यवस्था नहीं की गई है। डॉक्टरों बच्चों पर ठीक से ध्यान नहीं दे रहे हैं। हर घंटे बच्चे दम तोड़ रहे हैं। पिछली रात 12 बजे से कोई डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं है, सिर्फ कुछ नर्स ड्यूटी कर रही हैं।

बिहार सरकार ने माना, इस आपातकालीन स्थिति में ICU और बेड की है कमी

उधर, बिहार में चमकी बुखार से लगातार हो रही मौत, अस्पतालों की बदइंजामी और सरकार की गंभीरता पर उठ रहे सवालों के बीच बिहार के मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा कि सरकार शुरू से ही इस पर काम कर रही है। दवाओं को कोई कमी नहीं है। हालांकि, वर्तमान आपातकालीन स्थिति को देखते हुए ICU और बेड की कमी है।

‘SKM   में संसाधान कम, सरकार गंभीर नहीं’

चमकी बुखार से हो रही मौत और पीड़ित बच्चों के देखने के लिए लगातार पार्टियों के नेताओं के आने का सिलसिला बना हुआ है। शनिवार को सबसे पहले राष्ट्रीय जनता दल की टीम दोनों अस्पतालों में पहुंची। इसमें राजद के अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे, साहेबगंज के विधायक पूर्व मंत्री रामविचार राय, औराई विधायक सुरेन्द्र राय पहुंचे। प्रोफेसर पूर्वे ने कहा कि SKMCH  में संसाधानों की भारी कमी है।

 

Bihar : 'चमकी' बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर हुई 111, आखिर कौन है इन मौतों का ज़िम्मेदार ?
Source: Shutterstock.com

SKMCH  में नहीं बन पाया सौ बेड का विशेष एईएस वार्ड

केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद बीते पांच वर्षों में SKMCH  में सौ बेड का विशेष एईएस वार्ड नहीं बन सका है। इस वार्ड के निर्माण के लिए सरकार ने राशि भी उपलब्ध करा दी है। फिलहाल, ईएनटी वार्ड के ऊपरी मंजिल पर सौ बेड का पीICU वार्ड बनाना था। इस विशेष वार्ड के नहीं बनने से चार जगहों पर चमकी-बुखार से पीड़ित बच्चों को रखकर उनका इलाज किया जा रहा है। इससे बच्चों के इलाज में डॉक्टरों व नर्स आदि को परेशानी हो रही है।

फिलहाल, SKMCH  में दूसरी व तीसरी मंजिल पर दो-दो पीICU बनाया गया है। चार जगहों पर बीमार बच्चों के होने पर इलाज के लिए डॉक्टरों को भी भाग-दौड़ करनी पड़ रही है। पीड़ितों की संख्या और बढ़ने पर उनको ICU वार्ड में भी रखना पड़ सकता है।

इधर, SKMCH  के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही ने बताया कि मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए पांच साल पूर्व सौ बेड के PICU बनाने का निर्देश केंद्र सरकार ने दिया था। इसके लिए जगह का भी चयन कर लिया गया था। बीएमईसीआई को वार्ड का निर्माण करना था। लेकिन, किसी कारण से अब तक वार्ड तैयार नहीं हो सकता है। जगह की कमी के कारण फिलहाल चार जगहों पर PICU बनाया गया है। इससे मरीजों के इलाज में काफी कठिनाई हो रही है। विशेष वार्ड के बनने से एक साथ बच्चों को रखने व उनके इलाज में सुविधा होती।

 

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