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भारतीय बैंको पे आने वाली हे बड़ी मुसीबत -फिच रिपोर्ट

रेटिंग एजेंसी फिच की रिपोर्ट के मुताबिक, एसएमई (स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेस) और रियल्टी सेक्टर्स की कंपनियों के कर्ज को लेकर काफी जोखिम बना हुआ है. जिसके कारण भारतीय बैंक के लिए डूबे कर्ज की चिंता आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं. रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगले वित्त वर्ष (2019-20) में भारतीय बैंकों को 25 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी. साथ ही, डूबे कर्ज अगले साल भी बैंकों की सबसे बड़ी चिंता बनी रहेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, एसएमई (स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेस) और रियल्टी सेक्टर्स की कंपनियों के कर्ज को लेकर काफी जोखिम बना हुआ है. आपको बता दें कि नोटबंदी, जीएसटी और रेरा के बाद रियल्टी सेक्टर कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ है. पिछले 4 साल में कई कंपनियां भारी कर्ज़ के चलते डूब चुकी है.

source: livemint

आरबीआई की मज़बूत बैंलेंस शीट को बताया जरूरी- रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने रिजर्व बैंक के लिए मजबूत बैलेंस शीट की वकालत करते हुए कहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्वायत्तता और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिये यह जरूरी है. रिजर्व बैंक के बोर्ड मेंबर्स ने RBI रिजर्व की लिमिट तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्णय लिया है. अभी रिजर्व बैंक के पास 9.69 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व है. सरकार इसमें कमी की मांग कर रही है.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने आर्थिक मोर्चे पर जोखिमों को देखते हुए भारत की रेटिंग को फिलहाल स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-’ बनाए रखा है. यह लगातार 12वां साल है, जब रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग नहीं बढ़ाई. फिच ने भारत को बीबीबी- रेटिंग दी है. इसका मतलब है कि निवेश के लिहाज में सबसे नीचे है. source: news18

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