Share

Petition filed in High Court against name change of the city.

इलाहाबाद (ALLAHABAD) का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में 18 अक्तूबर को जारी अधिसूचना को चुनौती दी है। याचिका में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य लोगों को पक्षकार बनाया गया है।

याची के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव के अनुसार इलाहाबाद नाम के साथ पौराणिकता जुड़ी हुई है। यह प्रयागराज से अधिक पुराना है। प्रतिष्ठानपुरी के शासक मनु की पुत्री इला के नाम से इलावास बना, जो बाद में इलावास और फिर इलाहाबाद हो गया। अकबर से लेकर अंग्रेजों के शासनकाल में इलाहाबाद के नाम से ही इस जिले ने प्रसिद्धि पाई है। स्वतंत्रता आंदोलन में भी इसी नाम से इसकी ख्याति हुई।

याची ने कहानाम बदलने में नहीं हुआ संवैधानिक प्रावधानों का पालन

याची का कहना है कि सिर्फ नाम बदल देने से इसकी धार्मिकता में कोई वृद्धि नहीं होती है। प्रदेश सरकार ने नाम बदलने में संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का भी पालन नहीं किया। महाधिवक्ता से विधिक राय नहीं ली गई और न ही चेयरमैन बोर्ड ऑफ रेवेन्यू से कोई राय ली गई। राजस्व कानूनों के तहत सरकार को सिर्फ राजस्व क्षेत्र बढ़ाने का अधिकार है, नाम परिवर्तन करने का नहीं। याचिका में कई अन्य पौराणिक साक्ष्य भी दिए गए हैं।

source: mysuru today

याची के अधिवक्ता के मुताबिक याचिका में अर्द्धकुंभ का नाम बदलकर कुंभ करने को भी चुनौती दी गई है। यह पौराणिक मान्यताओं के विपरीत है। ऐसा करने से पूर्व न तो संतों से राय ली गई और न ही आम जनता की मंशा समझने की कोशिश की गई।
कुंभ और जिले का नाम बदलने के नाम पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। इस धनराशि का उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकता था। मांग की गई है कि जिले को प्रयागराज नाम बदलकर फिर से इलाहाबाद नाम दिया जाए और कुंभ को अर्द्धकुंभ किया जाए।

source: amarujala

Leave a Comment