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यौन उत्पीड़न मामले में CJI Ranjan Gogoi को क्लीनचिट मिलने के बाद Supreme Court के बाहर हंगामा, पीड़िता नें कहा – मेरे साथ ‘घोर अन्याय’ हुआ.

यौन उत्पीड़न मामले में CJI Ranjan Gogoi को क्लीनचिट मिलने के बाद Supreme Court के बाहर हंगामा, पीड़िता नें कहा – मेरे साथ ‘घोर अन्याय’ हुआ.

 CJI रंजन गोगोई को 19 अप्रैल , 2019 को Supreme Court के एक महिला पूर्व महिला कर्मचारी नें यौन उत्पिरण के आरोप लगाये थे जिसपर  CJI रंजन गोगोई Supreme Court द्वारा क्लीनचिट मिल गयी है . SC का कहना है की उसे खास सबूत प्राप्त नहीं हुए . इसे में पीडिता नें हंगामा खड़ा करदिया है .

Supreme Court के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई CJI Ranjan Gogoi को यौन उत्पीड़न के आरोपों से Supreme Court की तीन न्यायाधीशों की आंतरिक समिति ने क्लीनचिट देते हुये कहा है कि उसे उनके खिलाफ कोई ‘ठोस आधार’ नहीं मिला. इसके बाद मंगलवार को Supreme Court के बाहर प्रदर्शन को मिले. महिला वकील और कुछ NGO के सदस्यों Supreme Court परिसर के बाहर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया. पुलिस ने दिल्ली की लूटियंस जोन में बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने पर बैन लग रखा है. नारेबाजी के बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी. बता दें, Supreme Court की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने Chief Justice पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये थे.

CPI (एम) नेता वृंदा करात ने कहा, ‘प्रक्रिया पूरी तरह से अन्यायपूर्ण लग रही है. पीड़िता को रिपोर्ट क्यों नहीं दी जा सकती है? यह गलत है. जब वे मामले को खारिज कर रहे हैं, तो Supreme Court द्वारा अपनाई गई प्रक्रियाओं पर और अधिक सवाल उठते हैं. यह अन्याय है.’ Supreme Court परिसर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने शिकायतकर्तो को रिपोर्ट देने की मांग की है.


Supreme Court के सेक्रेटरी जनरल के कार्यालय के एक नोटिस में कहा गया है कि न्यायमूर्ति एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट ‘सार्वजनिक नहीं की जायेगी.’ समिति में दो महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी भी शामिल थीं. समिति ने एकपक्षीय रिपोर्ट दी क्योंकि इस महिला ने तीन दिन जांच कार्यवाही में शामिल होने के बाद 30 अप्रैल को इससे अलग होने का फैसला कर लिया था.

यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली Supreme Court की पूर्व महिला कर्मचारी ने कोर्ट की आंतरिक समिति द्वारा सोमवार को उन्हें क्लीन चिट दिये जाने पर कहा कि वह ‘बेहद निराश और हताश’ हैं. उन्होंने कहा कि भारत की एक महिला नागरिक के तौर पर उनके साथ ‘घोर अन्याय’ हुआ है और उनका ‘सबसे बड़ा डर’ सच हो गया तथा देश की सर्वोच्च अदालत से न्याय की उनकी उम्मीदें पूरी तरह खत्म हो गई हैं. महिला ने प्रेस के लिए एक बयान जारी कर कहा कि वह अपने वकील से परामर्श कर आगे के कदम के बारे में फैसला करेंगी.

Source: Tweeted By ANI

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई भी एक मई को समिति के समक्ष पेश हुये थे और उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया था. नोटिस में कहा गया है कि आंतरिक समिति को शीर्ष अदालत के पूर्व कर्मचारी की 19 अप्रैल, 2019 की शिकायत में लगाये गये आरोपों में कोई आधार नहीं मिला. इन्दिरा जयसिंह बनाम शीर्ष अदालत और अन्य के मामले में यह व्यवस्था दी गयी थी कि आंतरिक प्रक्रिया के रूप में गठित समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जायेगी. आंतरिक प्रक्रिया के अनुसार ही दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश ने यह रिपोर्ट स्वीकार की और इसकी एक प्रति संबंधित न्यायाधीश, प्रधान न्यायाधीश को भी भेजी गयी.

Source: NDTV India

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