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क्या काफिले के बीच स्थानीय नागरिकों को ‘रास्ता’ देना भारी पड़ा ?? जानिए !!

PULWAMA ATTACK यही देश का ब्लैक डे ,कल का हुआ हादसा अबतक का सबसे बड़ा हादसा माना जासकता है। इसी बीच बात यह भी है की सीआरपीएफ ने गुरुवार को अपने काफिले के रूट पर पूरी सावधानी बरती थी, लेकिन जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग के एक हिस्से को सिविलियन वीकल्स के प्रयोग की अनुमति देना घातक साबित हुआ।

नवभारत टाइम्स के लेख के अनुसार। सीआरपीएफ ने ग्रेनेड हमले या अचानक से होने वाली फायरिंग को लेकर काफी सतर्कता दिखाई थी और रूट की पूरी तरह से जांच की थी।

सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर जनरल (ऑपरेशन्स) कश्मीर ज़ुल्फिकार हसन ने हमारे सहयोगी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ‘रोड ओपनिंग पार्टी (RoP) ने गुरुवार सुबह पूरे रूट की चेकिंग की थी। उस रूट पर कहीं पर भी आईईडी नहीं पाया गया था और ना ही इस बात की संभावना छोड़ी गई थी कि कोई जवानों के काफिले पर फायरिंग कर सके या ग्रेनेड फेंक सके।’ सीआरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद का आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद कश्मीरी नागरिकों को दी गई आजादी का इस्तेमाल करते हुए एक सर्विस रोड से जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर आया।

source: India Today

आपको बता दें कि पहले जब सुरक्षाबलों का काफिला चलता था, तब बीच में सिविल गाड़ियों को नहीं आने दिया जाता थे। लेकिन हालात ठीक हो रहे थे तो काफिले के बीच में या आगे-पीछे सिविल गाड़ियां भी चलती रहती हैं, जो खतरनाक साबित हुआ। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने कहा, ‘स्थानीय नागरिक हमारी मूवमेंट से परेशानी ना महसूस करें, इसलिए हमने उनकी गाड़ियों को काफिले के आस-पास चलने की छूट दे रखी थी। इस तरह से हमला करने का तरीका नया है और हैरान करने वाला है।’ उन्होंने कहा कि सुरक्षाबल अब अपनी रणनीति में बदलाव करेंगे।

गौरतलब है कि गुरुवार को आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के जिस काफिले पर हमला किया, वह जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था और इसमें 78 वाहनों में 2,547 जवान शामिल थे। इस आतंकी हमले में 37 जवान शहीद हो चुके हैं और लगभग 20 जवानों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुआ यह हमला आतंकी हमले की पहली वारदात नहीं है। एक साल पहले 15 फरवरी 2018 को भी आतंकियों ने पुलवामा के पंजगाम स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक कैंप पर हमला किया था। इस वारदात के दौरान आतंकियों ने सीआरपीएफ के शिविर पर हमला कर कैंप में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन जवानों की सतर्कता के कारण कामयाब नहीं हो सके थे।

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