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क्या आप जानते हैं ?? अगर गर्मी का यही हाल रहा , तो भारत से खत्म हो जाएंगी 3.4 करोड़ नौकरियां !

क्या आप जानते हैं ?? अगर गर्मी का यही हाल रहा , तो भारत से खत्म हो जाएंगी 3.4 करोड़ नौकरियां !

बढती गर्म घरों के अंदर बेठे हुए लोगों की जान पर आगयी है तो फिर उनका क्या हाल होगा जो तपती  धुप में बहार काम करते होते हैं . कुछ इस प्रकार कर्मी की मार के बहुत सी नौकरियां जा सकती हैं जिसमे सबसे पहला नाम अत मजदूरों का , क्योंकि किसी को भी पैसा जान से प्यारा नहीं होता .

न्यूज़ 18 हिंदी के लेख के अनुसार , Global Warming की वजह से दुनिया लगातार गर्म हो रही है. गर्मियों में तापमान बढ़ता ही जा रहा है. बेमौसम बारिश की वजह से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि Global Warming का असर सिर्फ पर्यावरण और मौसम पर ही नहीं पड़ रहा है. Global Warming ने लोगों के काम पर भी असर डाला है. यूएन लेबर एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक Global Warming की वजह से भारत में 2030 तक काम के घंटे 5.8 फीसदी तक कम हो जाएंगे. ये 3.4 करोड़ फुल टाइम जॉब के खोने के बराबर होगा.

Global Warming का सबसे ज्यादा असर एग्रीकल्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर पड़ेगा. ज्यादा गर्मी होने की वजह से किसान अपने खेतों में ज्यादा वक्त नहीं दे पाएंगे. उसी तरह से निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर भी ज्यादा गर्मी की वजह से प्रभावित होंगे और उनकी उत्पादकता कम होगी.

International Labour Organisation (ILO) ने रिपोर्ट जारी की है. इसके मुताबिक प्लैनेट के गर्म होने की वजह से काम पर असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. 2030 तक पूरी दुनिया में काम करने के घंटे करीब 2 परसेंट हर साल की दर से कम होते जाएंगे. ऐसा ज्यादा गर्मी की वजह से काम न होने या फिर सुस्त तरीके से काम होने की वजह से होगा.

क्या आप जानते हैं ?? अगर गर्मी का यही हाल रहा , तो भारत से खत्म हो जाएंगी 3.4 करोड़ नौकरियां !
Source: Wonderwalks

Global Warming की वजह से पूरी दुनिया में काम की उत्पादकता पर असर पड़ेगा

रिपोर्ट के मुताबिक इक्कीसवीं सदी के आखिर तक दुनिया का तापमान करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा. बढ़ते तापमान की वजह से 2030 तक पूरी दुनिया में काम के कुल घंटे करीब 2.2 परसेंट तक कम हो जाएंगे. ये तकरीबन 8 करोड़ फुल टाइम जॉब खोने जैसा होगा. अगर फायनेंसियल लॉस के हिसाब से सोचें तो 2030 तक Global Warming की वजह से करीब 2400 अरब डॉलर का नुकसान होगा. अगर सदी के अंत तक तापमान में और वृद्धि होती है तो ये नुकसान और बड़ा हो सकता है.

ग्लोबल वार्मंग का सबसे ज्यादा प्रभाव दक्षिण एशिया के देशों पर पड़ेगा. यहां काम के घंटों का ज्यादा नुकसान होगा. एक अनुमान के मुताबिक Global Warming की वजह से 2030 तक करीब 5.3 परसेंट काम के घंटे कम हो जाएंगे. ये 4.3 करोड़ फुल टाइम जॉब खोने के बराबर होगा. दक्षिण एशिया के करीब दो तिहाई देश करीब 2 परसेंट का नुकसान झेलने को मजबूर होंगे.

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Source: business Standards

भारत में Global Warming से सबसे ज्यादा नुकसान

भारत का नुकसान और बड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक Global Warming की वजह से 1995 में काम के घंटों में 4.3 परसेंट का नुकसान हुआ था. अब 2030 तक ये बढ़कर 5.8 परसेंट हो जाएगा. भारत की आबादी भी ज्यादा है. इस वजह से 2030 तक करीब 3.4 करोड़ फुल टाइम जॉब खोने जैसा होगा. भारत में सबसे ज्यादा असर खेती के काम काज पर पड़ेगा. चिंताजनक बात ये है कि खेती के कामधंधे से ही आबादी का बड़ा हिस्सा जुड़ा है. कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर भी बुरा असर होगा. मजदूरों को काम करने में परेशानी होगी. जिसका सीधा असर निर्माण क्षेत्र की उत्पादकता पर पड़ेगा.

Global Warming की वजह से विभिन्न देशों के जीडीपी पर भी पड़ेगा. एक अनुमान के मुताबिक थाईलैंड, कंबोडिया, भारत और पाकिस्तान जैसे देशों की जीडीपी पर करीब 5 फीसदी तक का असर पड़ेगा.

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