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नतीजों से पहले ही पिछड़ रही है BJP , छठे चरण में हो सकता हे नुकसान.

नतीजों से पहले ही पिछड़ रही है BJP , छठे चरण में हो सकता हे नुकसान.

LOKSABHA ELECTIONS 2019 का छटा  चरण कल है जिसमे देश की राजधानी दिल्ली में भी चुनाव होना है , बता दें की BJP का छटे चरण से पहले ही हाल बेहाल होता दिख रहा है . खबरे मिली हैं की BJP के सहिन्योगी दल BJP का साथ छोड़ रहे हैं . जिससे BJP की बहुमत की दावेदारी कम होती दिखाई दे रही है .

दावे कर रही हो लेकिन पार्टी के लिए यह चुनाव मुश्किलों भरा है वहीं परिणाम आने से पहले ही उसके कई सहयोगी उसका साथ छोड़ रहे हैं। ऐसे में उसकी मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। पांचवे चरण के मतदान से पहले ही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने BJP से अलग होने की घोषणा कर दी है। यह पूर्वी यूपी में BJP के लिए बड़ी मुसीबत है। एक अनुमान के मुताबिक राजभर समाज पूर्वी यूपी में कुल जनसंख्या का 20 फीसदी है और यादव जाति के बाद सबसे बड़ी राजीतिक भूमिका निभाता है। BJP के 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत मिली थी और इसमें ओमप्रकाश राजभर की बड़ी भूमिका थी। ओमप्रकाश राजभर ने BJP की जीत में अहम योगदान दिया था। 2017 विधानसभा चुनाव में BJP ने ओमप्रकाश राजभर की पार्टी को 8 सीटें दी थीं।

BJP की हार का सबूत खुद BJP के नामी गिरामी नेता भी दे रहे हैं खुद BJP के बड़े नेता सुब्रमनियम स्वामी और राम माधव जी नतीजों से पहले नोल चुके हैं की BJP बहुमत से काफी पीछे रह जाएगी .

अब पूर्वी UP के सीटों पर ही चुनाव होना बाकी है, ऐसे में BJP के लिए राजभर की पार्टी का अलग हो जाना बड़ा झटका माना जा रहा है। इसका असर वाराणसी लोकसभा सीट पर भी पड़ सकता है जहां से पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं। यहां सातेंव चरण में चुनाव होना है।

छटे चरण की क्या हैं परेशानियाँ :

  • छठे चरण में भी BJP के लिए कई परेशानियां हैं। इस चरण में SP-BSP  गठबंधन BJP को कई सीटों पर मात देती दिख रही है। आजमगढ़ से इस बार समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें कांग्रेस का भी समर्थन हासिल है, ऐसे में यहां BJP के लिए कुछ बचता नहीं है। 2014 में भी BJP को इस सीट पर सिर्फ 28 फीसदी ही वोट मिले थे। जौनपुर में भी वोट प्रतिशत SP-BSP  प्रत्याशी के पक्ष में ही है। लालगंज में भी यही हाल था, हालांकि BJP सिर्फ 36 फीसदी वोट पा कर जीत गई थी। लेकिन इस बार हालात अलग हैं।
  • अंबेडकर नगर सीट पर BJP को 41.77 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन इस बार यहां भी BJP का जितना मुश्किल लग रहा है। यह बीएसपी का पारंपरिक सीट है। बीएसपी की मुखिया मायावती यहां से सांसद भी रह चुकी हैं। पहले यह सीट अकबरपुर से नाम से जाना जाता था। परिसीमन के बाद यह अंबेडकर नगर के नाम से जाना जाने लगा। मायावाती ने ऐलान भी कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वो यहां से उपचुनाव लड़ सकती हैं। 2014 के चुनाव में बीएसपी और एसपी के वोट को मिला दिया जाए तो महागठबंधन को यहां 51 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं विधानसभा में भी यहां की पांचों सीटों पर बीएसपी का ही कब्जा है।
Source: India TV
  • श्रावस्ती सीट भी BJP से दूर जाती दिख रही है। 2014 में BJP का उम्मीदावर 35 फीसदी वोट पा कर यहां से जीता था, जबकि बीएसपी-एसपी के उम्मीदवारों का संयुक्त रूप से 64 प्रतिशत मत मिले थे। विधानसभा में भी अगर दोनों पार्टियां गठबंधन करतीं तो BJP के लिए यहां खाता खोलना भी मुश्किल हो जाता। मछलीशहर का भी यही हाल था। 2014 में BJP को 44 प्रतिशत वोट मिले थे। हालांकि उसके उम्मीदवार की जीत हुई थी, लेकिन बीएसपी-एसपी उम्मीदवारों के वोट प्रतिशत को मिला दिया जाए तो यहां वो 46 फीसदी हो जाता है जो BJP से 2 फीसदी ज्यादा है। मतलब साफ है यहां भी BJP के लिए रास्ता आसान नहीं है।
  • बात करें सुलतानपुर की तो पिछले चुनाव में BJP के वरुण गांधी यहां से चुनाव जीते थे। उन्हें कुल 42.51 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं एसपी-बीएसपी के उम्मीदवारों का मत प्रतिशत 47 फीसदी था। हालांकि BJP ने इस बार यहां से मेनका गांधी को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन स्थिति कमोबेश पहले ही जैसा दिख रहा है। यहां भी BJP को हार का सामना करना पड़ सकता है।
  • 2014 के चुनाव में फुलपुर लोकसभा सीट पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या जीते थे। उन्हें 52 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे। लेकिन उपचुनाव में BJP को यहां से हार का सामना करना पड़ा था। BJP को सिर्फ 38 फीसदी वोट मिले।
  • यही हाल इलाबादा का है। यहां BJP सिर्फ 35 फीसदी वोट पा कर जीत गई थी। लेकिन तब बीएसपी और एसपी अलग अलग चुनावी मैदान में थे। इस बार दोनों साथ हैं। 2014 के चुनाव में मिले दोनों के उम्मीदवारों के वोट को जोड़ दें तो इन्हें 46 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। हार का डर BJP को भी है। पार्टी ने मौजूदा सांसद का टिकट काट दिया है। कांग्रेस छोड़ BJP में गईं रीता बहुगुणा जोशी यहां से उम्मीदवार हैं।
  • डुमरियागंज में भी BJP को सिर्फ 32 फीसदी ही वोट मिले थे। हालांकि BJP का उम्मीदवार यहां से जीतने में कामयाब रहा था। लेकिन तब भी महागठबंधन का संयुक्त मत 40 प्रतिशत से ज्यादा था। बस्ती और संतकबीरनगर में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। लेकिन इस बार हालात बिल्कुल बदले हुए हैं। बाकी चरणों की तरह ही आखिर के दो चरण में भी BJP के लिए राह आसान नहीं है। ओमप्रकाश राजभर के साथ छोड़ने से BJP की हालात और पतली हो गई है। ऐसे में 2014 चुनाव के जीत को दोहराना BJP के लिए असंभव सा लग रह है।

Source: नवजीवन 

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