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मुझे चुनाव लड़ने से रोकने के लिए मोदी सरकार अपना रही तानाशाही रवैैया, बोले- PM Modi के खिलाफ ताल ठोकने वाले Tej Bahadur Yadav

मुझे चुनाव लड़ने से रोकने के लिए मोदी सरकार अपना रही तानाशाही रवैैया, बोले- PM Modi के खिलाफ ताल ठोकने वाले Tej Bahadur Yadav

देश के जवान Tej Bahadur Yadav के PM Modi के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने से Varanasi का माहोल गरम हो गया और BJP की धड़कने तेज़ . लेकिन Varanasi से Tej Bahadur का नामांकन रद्द कर कहीं न कहीं PM Modi नें अपनी तानाशाही का सबूत देदिया है . नामांकन रद्द होने के बाद Tej Bahadur और उनके समर्थकों की आरह विडियो और ट्वीट से पता चल रहा है की Tej Bahadur के नामांकन रद्द होने की वजह बेबुनियाद थी .

PM Modi के खिलाफ ताल ठोंकने वाले BSF के बर्खास्त Tej Bahadur Yadav का नामांकन पत्र खारिज हुआ तो वे अब Supreme Court  जाने की तैयारी में हैं. नामांकन पत्र खारिज होने के बाद Tej Bahadur Yadav ने दावा किया कि उन्होंने चुनाव अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज सौंपे थे. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, “मैंने BSF में रहते हुए उसी बारे में आवाज बुलंद की, जिसे मैंने गलत पाया. मैंने न्याय की उस आवाज को बुलंद करने बनारस आने का फैसला किया था. अगर मेरे नामांकन में कोई समस्या थी तो एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में दाखिल करने (मेरे कागजात) के समय उन्होंने मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया. 


Tej Bahadur Yadav नें  BJP पर खुद को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए “तानाशाही कदम” का सहारा लेने का आरोप लगाया. Tej Bahadur Yadav  ने कहा “मेरे दादा आजाद हिंद फौज के साथ थे, मैं एक किसान का बेटा हूं और एक जवान के रूप में सेवा की… मैं अब चुनाव भी नहीं लड़ सकता. यह तानाशाही है”. उनके वकील राजेश गुप्ता ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे”. इससे आप समझ सकते हैं की जब एक देश  के जवान की कोई नहीं सुन रहा तो आम आदमी का क्या होगा ,  “. दरअसल, वाराणसी के जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने मंगलवार को Tej Bahadur Yadav  के नामांकन पत्र के दो सेटों में ‘कमियां’ पाते हुए उनसे बुधवार को 11 बजे तक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा था.


गौरतलब है कि Tej Bahadur Yadav ने 24 अप्रैल को निर्दलीय और 29 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया था. Tej Bahadur Yadav ने BSF से बर्खास्तगी को लेकर दोनों नामांकनों में अलग अलग दावे किए थे. इसी बिंदु पर जिला निर्वाचन कार्यालय ने यादव को नोटिस जारी करते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश दिया था. Varanasi के जिला मजिस्ट्रेट सुरेन्द्र सिंह ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 9 और धारा 33 का हवाला देते हुए कहा कि तेज बहादुर यादव का नामांकन इसलिये स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि वह निर्धारित समय में “आवश्यक दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं कर सके”. यह बात कहीं न कहीं यह सोचने पर मजबूर करदेती है की दाल में कुछ काला है . नामांकन रद्द होने के बाद kashi के साधुओं की एक विडियो सामने आरही है जिसमे वह मोदी सरकार की तानाशाही बताते हुए इस बात का सबूत दे रहे हैं की नामांकन बेवजह रद्द किये जा रहे हैं . अब इसे में इन बातों का फैसला तो जनता को करना होगा कि कौन सही है और कौन ग़लत .

Source: NDTV India 

 

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