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PM Modi ओर Amit Shah को  पांच क्लीनचिट मिलने पर , चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने किया था विरोध। जानिए पूरा मामला

PM Modi ओर Amit Shah को पांच क्लीनचिट मिलने पर , चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने किया था विरोध। जानिए पूरा मामला

Loksabha Elections 2019 के चलते BJP ओर खुद PM मोदी ने काई बार आचार सहिंता का उलंघन किया इसपर पुरे देश का सवाल था की आखिर चुनाव आयोग चुप क्यों है। इस बीच PM Modi और Amit Shah के ऊपर कई आरोपी भी लगे लेकिन मज़े की बात यह है की उन्हें बार – बार क्लीनचिट मिलती रही। लेकिन सच ज़्यादा देर तक छुपता नहीं है। लेकिन सूत्र बता रहें हैं कि मोदी और शाह को मिली पांच क्लीनचिट का चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने काफी विरोध किया था।

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP अध्यक्ष Amit Shah के खिलाफ आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन की पांच अलग-अलग शिकायतों के मामले में बहुमत से अलग मत रखा है. इन पांच शिकायतों में से चार शिकायतें PM Modi से जुड़ी हैं.

Indian Express के अनुसार, शनिवार को चुनाव आयोग ने आचार संहिता के तहत मोदी के एक अन्य भाषण को क्लीनचिट दे दी. यह उनकी 21 अप्रैल को गुजरात के पाटन स्थित रैली में दिए गए भाषण से जुड़ी थी.

अपने उस भाषण में PM Modi ने दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने वायुसेना पायलट अभिनंदन वर्धमान को वापस नहीं किया तो उसके बुरे नतीजे भुगतने पड़ेंगे.

लवासा ने 1 अप्रैल को महाराष्ट्र के वर्धा और 6 अप्रैल को नांदेड़ में दिए गए PM Modi के भाषण को क्लीनचिट दिए जाने का विरोध किया था. इसके साथ ही 9 अप्रैल को लातुर और चित्रदुर्ग में बालाकोट हवाई हमला और पुलवामा हमले का उल्लेख करते हुए पहली बार वोट देने वालों से की गई अपील को भी क्लीनचिट देने का विरोध किया था.

Source: BW Businessworld

उन्होंने 9 अप्रैल को नागपुर में दिए गए शाह के भाषण को भी क्लीनचिट देने पर अपने सहयोगियों से असहमति जताई थी. इस भाषण में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi  की दूसरी सीट की तुलना पाकिस्तान से की थी.

हालांकि चुनाव आयोग ने अभी चित्रदुर्ग की शिकायत के निपटारे की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. बता दें कि अशोक लवाला के अलावा चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्य मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा हैं.

ऊपर जितने भी मामलों का जिक्र किया गया है उनका फैसला 2-1 के बहुमत से हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस के संपर्क करने पर इन मामलों पर कोई टिप्पणी करने से लवासा ने इनकार कर दिया.

वहीं पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त S.Y.Qureshi  ने कहा, असहमति उद्देश्यपूर्व विचार-विमर्श का एक स्वस्थ्य संकेत है. चुनाव आयोग को लेकर मेरी उम्मीद बरकरार है.

चुनाव आयोग की धारा 10 (नाव आयुक्तों की सेवा की शर्तें और ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस) अधिनियम, 1991 के अनुसार, चुनाव आयोग के सभी काम जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से होने चाहिए.

यह प्रावधान यह भी कहता है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के विचारों में मतभेद होता है तो ऐसे मामलों का निपटारा बहुमत के आधार पर होगा.

बता दें कि Supreme Court ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि वह PM Modi और Amit Shah पर Congress द्वारा दर्ज सभी आचार संहिता उल्लंघन के मामलों का निपटारा सोमवार तक करे. Supreme Court का यह आदेश कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव की याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने शिकायतों पर चुनाव आयोग द्वारा तत्काल कार्रवाई की मांग की थी.  अब ऐसे हादसे जनता को यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं की आखिर किसपर यकीन किया जाए और किसपर नहीं। लेकिन जनता को अपनी समझदारी दिखानी चाहिए और मतदान से अपना जवाब देना चाहिए.

Source: TV9Bharatvarsh

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