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बिलकिस बानो को दो हफ्ते में मुआवजा और नौकरी दे गुजरात सरकार, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

बिलकिस बानो को दो हफ्ते में मुआवजा और नौकरी दे गुजरात सरकार, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को आदेश दिया है कि वह गुजरात दंगों की पीड़िता बिलकिस बानो को 50 लाख रुपये का मुआवजा, नौकरी और आवास प्रदान करे. इसके लिए सरकार को दो सप्‍ताह का समय दिया गया है.

इसी साल अप्रैल में, सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस याकूब रसूल को 50 लाख रुपये मुआवजा राशि देने और उसका पुनर्वास करने के आदेश दिए थे. बिलकिस बानो के साथ 19 साल की उम्र में गोधरा दंगों के दौरान सामूहिक दुष्कर्म किया गया था. उनकी बेटी को भी मार डाला गया था.

अदालत ने गुजरात सरकार को उसे एक राज्य सरकार की नौकरी और उसकी पसंद के स्थान पर घर मुहैया कराने के आदेश दिए थे. सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार के वकील के उस पक्ष को भी खारिज कर दिया था, जिसमें मुआवजा राशि को अत्यधिक बताया गया था. इसके बदले उसे केवल 10 लाख रुपये देने की अपील की गई थी. इससे पहले, राज्य सरकार की ओर से उसे केवल पांच लाख रुपये मुआवजा दिया गया था.

हमले के वक्‍त सिर्फ 21 साल की थीं बिलकिस बानो

गुजरात दंगों के दौरान बचकर भाग रही बिलकिस और उनके परिवार पर 3 मार्च, 2002 को हथियारों से लैस भीड़ ने हमला किया था. दंगाइयों ने बिलकिस बानो का गैंगरेप किया. उनकी 3 साल की बच्‍ची को पीट-पीटकर मार दिया गया. बिलकिस बानो के परिवार के कुल 14 लोगों को उस दिन मौत के घाट उतार दिया गया था. तब बिलकिस बानो की उम्र सिर्फ 21 साल थी. बिलकिस बानो ने न्‍याय हासिल करने के लिए स्‍थानीय पुलिस, एनजीओ, सीजीआई से लेकर शीर्ष अदालत तक का दरवाजा खटखटाना पड़ा.

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