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राहुल 10 विपक्षी नेताओं के साथ श्रीनगर रवाना, प्रशासन ने आने से किया मना

राहुल 10 विपक्षी नेताओं के साथ श्रीनगर रवाना, प्रशासन ने आने से किया मना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी 10 विपक्षी नेताओं के साथ शनिवार को श्रीनगर के लिए रवाना हो गए। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहली बार विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल राज्य के दौरे पर जा रहा है। राहुल राज्य के हालात का जायजा लेंगे और स्थानीय नागरिकों से भी मुलाकात करेंगे।

इसी बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से कहा गया है कि नेता राज्य का दौरा करने न आएं। उनके आने से शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशों में खलल पड़ सकता है। नेताओं को यहां आने से बचना चाहिए। अब तक किसी भी नेता को राज्य के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया है।

वहीं  कुछ दिन पहले ही गुलाम नबी आज़ाद भी श्रीनगर गए थे लेकिन उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया था.  इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन का बयान आया है जिसमें कहा गया है कि विपक्षी नेता कश्मीर न आएं और सहयोग करें. प्रशासन ने ट्वीट किया है कि नेताओं के दौरे से असुविधा होगी. प्रशासन का कहना है कि  नेता उन प्रतिबंधों का भी उल्लंघन कर रहे होंगे जो अभी तक कई क्षेत्रों में लगे हैं. नेताओं को समझना चाहिए कि शांति व्यवस्था बनाए रखने और नुक़सान रोकने को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी जाएगी.

अनुमति मिलने पर वे अन्य हिस्सों में जा सकते हैं

यदि इन्हें अनुमति दी जाएगी तो ये राज्य के अन्य हिस्सों में भी जा सकते हैं। अभी तक, अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से राज्य में किसी भी राजनीतिक दल के नेता को जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। स्थानीय नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को नजरबंद रखा गया है।

राहुल-मलिक के बीच बहस हो चुकी है

इससे पहले, कांग्रेस के सांसद गुलाम नबी आजाद को राज्य में प्रवेश नहीं दिया गया था और उन्हें दो बार जाने से रोका गया था। डी राजा को भी श्रीनगर एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया था। राहुल गांधी और राज्यपाल सत्यपाल मलिक के बीच राज्य का दौरा करने को लेकर ट्विटर पर बहस भी हो गई थी।

प्रशासन ने नेताओं को दौरा न करने को कहा है

इस बीच, जम्मू कश्मीर प्रशासन ने नेताओं से अनुरोध किया है कि वे श्रीनगर का दौरा न करें क्योंकि ऐसा करने से वहां आम जनता को असुविधा हो सकती है। घाटी के कई क्षेत्रों में अभी भी पाबंदियां लागू हैं, जिनका नेताओं के दौरे से उल्लंघन हो सकता है।

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